सेक्स, शक्ति, धन और भौतिकवाद: क्या ये जीवन को संतुष्टि दे सकते हैं? | बिली ग्राहम संदेश

सेक्स, शक्ति, धन और भौतिकवाद: क्या ये जीवन को संतुष्टि दे सकते हैं? | बिली ग्राहम संदेश

परिचय और सुलैमान की खोज


आज रात मैं चाहता हूँ कि आप मेरे साथ मत्ती रचित सुसमाचार अध्याय 12 खोलें, विशेष रूप से पद 38 से आगे।


यीशु से कुछ शास्त्रियों और फरीसियों ने कहा:


"गुरु, हम आपसे कोई चिन्ह देखना चाहते हैं।"

 

परन्तु यीशु ने उत्तर दिया:


"यह दुष्ट और व्यभिचारी पीढ़ी चिन्ह चाहती है, परन्तु इसे योना भविष्यद्वक्ता के चिन्ह के सिवा कोई और चिन्ह नहीं दिया जाएगा।"

  

यीशु ने योना का उदाहरण दिया। जैसे योना तीन दिन और तीन रात बड़ी मछली के पेट में रहा, वैसे ही मनुष्य का पुत्र (यीशु) तीन दिन और तीन रात पृथ्वी के भीतर रहेगा। यह उनके मृत्यु और पुनरुत्थान का संकेत था।


यीशु ने कहा कि नीनवे के लोग न्याय के दिन इस पीढ़ी के विरुद्ध खड़े होंगे, क्योंकि उन्होंने योना के प्रचार पर मन फिराया था।


फिर यीशु ने कहा:


"देखो, यहाँ योना से भी महान एक है।"

 

इसके बाद उन्होंने सुलैमान का उल्लेख करते हुए कहा:


"देखो, यहाँ सुलैमान से भी महान एक है।"

 

आज के युवाओं की खोज


सुलैमान का जीवन आज के लोगों, विशेषकर युवाओं, के जीवन जैसा था।


आज के युवा खोज रहे हैं:


  • ज्ञान
  • सुरक्षा
  • प्रेम
  • पहचान
  • जीवन का उद्देश्य

वे अपने कपड़ों, मित्रों, खरीदारी, मनोरंजन और लोकप्रिय संस्कृति के माध्यम से स्वयं को परिभाषित करने का प्रयास करते हैं।


फिर भी बहुत से युवा भीतर से अकेले हैं।


बिली ग्राहम बताते हैं कि उन्होंने एक प्रमुख विश्वविद्यालय के डीन से पूछा:


"आपके विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी समस्या क्या है?"

 

उत्तर था:


"जीवन में उद्देश्य और अर्थ की कमी।"

 

सुलैमान का निष्कर्ष


सुलैमान ने जीवन में लगभग सब कुछ प्राप्त किया।


लेकिन अंत में उसका निष्कर्ष था:


"व्यर्थ ही व्यर्थ, सब कुछ व्यर्थ है।"

 

यहाँ "व्यर्थ" का अर्थ है:


एक ऐसा बुलबुला जो कुछ क्षण चमकता है और फिर फूट जाता है।


सुलैमान ने हर प्रकार का सुख, उपलब्धि और अनुभव प्राप्त किया, लेकिन अंत में उसे लगा कि इनमें स्थायी संतुष्टि नहीं है।


1. सुलैमान ने ज्ञान की खोज की


सुलैमान संसार के सबसे बुद्धिमान मनुष्यों में से एक था।


1 राजा 4:30 कहता है कि उसकी बुद्धि पूर्व और मिस्र के सभी ज्ञानियों से बढ़कर थी।


उसने कहा:


"मैंने बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करने के लिए अपना हृदय लगाया।"

 

लेकिन अंत में उसने पाया कि केवल ज्ञान जीवन की गहरी प्यास को नहीं बुझा सकता।


मनुष्य चाहे:


  • अनेक डिग्रियाँ प्राप्त कर ले,
  • संसार का सारा ज्ञान जुटा ले,

फिर भी उसके हृदय में एक खालीपन बना रह सकता है।


मनुष्य की समस्या केवल अज्ञान नहीं, पाप है


बिली ग्राहम बताते हैं कि बाइबल कहती है:


  • हमारे मन पाप से प्रभावित हैं।
  • शैतान लोगों की आँखों को अंधा कर देता है।
  • मनुष्य का मन परमेश्वर से दूर हो गया है।

यही कारण है कि बढ़ते ज्ञान के बावजूद संसार में:


  • युद्ध हैं
  • परमाणु हथियार हैं
  • हिंसा है
  • नैतिक पतन है

ज्ञान बढ़ा है, लेकिन शांति नहीं बढ़ी।


समाधान क्या है?


बिली ग्राहम कहते हैं:


"अपने मन को मसीह के अधीन कर दो।"

 

बाइबल कहती है:


"अपने मन के नए हो जाने से रूपान्तरित होते जाओ।"

 

जब यीशु मसीह हमारे जीवन के प्रभु बनते हैं, तो वे केवल हमारे पाप क्षमा नहीं करते, बल्कि हमारे सोचने के तरीके को भी बदल देते हैं।


सुलैमान की दूसरी खोज — सुख, सेक्स और भोग-विलास


सुलैमान केवल ज्ञान की खोज तक सीमित नहीं रहा। उसने सोचा कि शायद जीवन का असली अर्थ सुख और आनंद में मिलेगा।


सभोपदेशक 2:1 में वह कहता है:


"मैंने अपने मन में कहा, आ, मैं तुझे आनंद के द्वारा परखूँगा; इसलिए सुख भोग।"

 

सुलैमान ने अपने समय के हर प्रकार के सुख का अनुभव किया।


उसके पास:


  • शानदार महल थे,
  • सुंदर बगीचे थे,
  • संगीतकार थे,
  • मनोरंजन के सभी साधन थे,
  • उत्तम भोजन और पेय थे।

लेकिन एक बात और थी जिसके लिए वह प्रसिद्ध था।


सेक्स और कामुकता की खोज


बिली ग्राहम बताते हैं कि सुलैमान के पास:


  • 700 पत्नियाँ थीं
  • 300 रखैलें थीं

दुनिया का शायद ही कोई व्यक्ति उसके समान भोग-विलास में जीया हो।


यदि किसी ने यह सोचा कि:


"यदि मेरे पास पर्याप्त यौन सुख होगा तो मैं संतुष्ट हो जाऊँगा,"

 

तो सुलैमान के पास वह सब कुछ था।


लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अंत में उसने कहा:


"व्यर्थ ही व्यर्थ, सब कुछ व्यर्थ है।"

 

यानी यह भी उसकी आत्मा की प्यास को नहीं बुझा सका।


सुख क्यों पर्याप्त नहीं है?


आज भी लोग सोचते हैं:


  • यदि मुझे सही जीवनसाथी मिल जाए...
  • यदि मुझे रोमांटिक प्रेम मिल जाए...
  • यदि मैं अपनी इच्छाएँ पूरी कर लूँ...

तो मैं पूरी तरह संतुष्ट हो जाऊँगा।


लेकिन वास्तविकता यह है कि मनुष्य का हृदय केवल शारीरिक सुख के लिए नहीं बनाया गया।


परमेश्वर ने हमारे भीतर एक ऐसी आत्मिक प्यास रखी है जिसे केवल वही भर सकता है।


बाहरी मुस्कान, अंदर खालीपन


बिली ग्राहम लोगों से पूछते हैं:


"क्या आप बाहर से मुस्कुरा रहे हैं लेकिन अंदर रो रहे हैं?"

 

कई लोगों के जीवन में:


  • अच्छी नौकरी है,
  • परिवार है,
  • मनोरंजन है,
  • मित्र हैं,

फिर भी भीतर कोई खालीपन है।


कुछ लोगों के विवाह में समस्या है।


कुछ लोगों के मित्रों के साथ संबंध टूट रहे हैं।


कुछ लोगों को अपने जीवन का उद्देश्य समझ नहीं आता।


उन्हें लगता है कि कुछ महत्वपूर्ण चीज़ गायब है।


यीशु ही सच्चा आनंद देते हैं


बिली ग्राहम कहते हैं कि वह खालीपन किसी वस्तु से नहीं भरता।


न ही:


  • सेक्स,
  • मनोरंजन,
  • पार्टियाँ,
  • प्रसिद्धि,

उसे भर सकती हैं।


वह खालीपन केवल यीशु मसीह भर सकते हैं।


क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने लिए बनाया है।


जब तक हम उसके साथ संबंध में नहीं आते, तब तक हमारा हृदय बेचैन रहता है।


पाप की समस्या


बाइबल कहती है:


"सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।"

 

पाप केवल एक गलत कार्य नहीं है।


यह एक ऐसी बीमारी है जिसने सम्पूर्ण मानवता को प्रभावित किया है।


इस कारण:


  • हमारे विचार प्रभावित हुए,
  • हमारी इच्छाएँ प्रभावित हुईं,
  • हमारे संबंध प्रभावित हुए।

इसीलिए संसार में इतनी बेचैनी और असंतोष दिखाई देता है।


क्रूस ही उत्तर है


बिली ग्राहम बार-बार लोगों को क्रूस की ओर बुलाते हैं।


वे कहते हैं:


"मसीह के पास आओ।"

 

क्योंकि:


  • वही पाप क्षमा करते हैं,
  • वही जीवन को नई दिशा देते हैं,
  • वही सच्चा आनंद देते हैं।

मुख्य संदेश


सुलैमान ने:


  • ज्ञान खोजा,
  • सुख खोजा,
  • सेक्स और भोग-विलास खोजा,

लेकिन इनमें से कोई भी उसे स्थायी संतुष्टि नहीं दे सका।


उसका निष्कर्ष था:


"सब कुछ व्यर्थ है।"

 

क्योंकि मनुष्य की सबसे गहरी आवश्यकता परमेश्वर के साथ संबंध है।


सुलैमान की तीसरी खोज — धन और भौतिकवाद


ज्ञान और सुख की खोज के बाद सुलैमान ने सोचा कि शायद धन और संपत्ति उसे वह संतुष्टि दे सकें जिसकी उसे तलाश थी।


और यदि संसार में कोई व्यक्ति धन के द्वारा संतुष्टि खोज सकता था, तो वह सुलैमान था।


बिली ग्राहम बताते हैं कि सुलैमान संसार के इतिहास के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक था। उसकी वार्षिक आय इतनी विशाल थी कि आज के अरबपतियों की संपत्ति भी उसके सामने छोटी लग सकती है।


सुलैमान की अपार संपत्ति


बाइबल बताती है कि:


  • उसके पास सोने का अथाह भंडार था।
  • उसके अस्तबल में 40,000 घोड़े थे।
  • उसके राज्य में वैभव और समृद्धि की कोई कमी नहीं थी।

उसके पास वह सब कुछ था जिसका अधिकांश लोग केवल सपना देखते हैं।


यदि धन खुशी दे सकता था, तो सुलैमान संसार का सबसे प्रसन्न व्यक्ति होना चाहिए था।


लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


फिर भी हृदय खाली रहा


एक दिन सुलैमान ने अपने जीवन की ओर देखा और कहा:


"व्यर्थ ही व्यर्थ, सब कुछ व्यर्थ है।"

 

उसने महसूस किया कि धन, महल, सोना और वैभव उसकी आत्मा की भूख को नहीं मिटा सके।


उसके पास सब कुछ था, लेकिन फिर भी कुछ कमी थी।


धन का धोखा


आज भी बहुत लोग सोचते हैं:


  • "यदि मेरे पास थोड़ा और पैसा होता..."
  • "यदि मेरी आय बढ़ जाए..."
  • "यदि मैं अमीर बन जाऊँ..."

तो मैं खुश हो जाऊँगा।


लेकिन वास्तविकता यह है कि धन की इच्छा कभी समाप्त नहीं होती।


यदि किसी को हजार मिल जाए, तो वह दस हजार चाहता है।


दस हजार मिल जाएँ, तो वह लाख चाहता है।


लाख मिल जाएँ, तो करोड़ चाहता है।


धन स्वयं में बुरा नहीं है, लेकिन धन को जीवन का लक्ष्य बना लेना खतरनाक है।


यीशु की चेतावनी


यीशु ने कहा:


"सावधान रहो और लोभ से बचो, क्योंकि मनुष्य का जीवन उसकी संपत्ति की बहुतायत पर निर्भर नहीं करता।"

 

मनुष्य का मूल्य:


  • उसके बैंक खाते से नहीं,
  • उसकी कार से नहीं,
  • उसके घर से नहीं,

बल्कि परमेश्वर के साथ उसके संबंध से निर्धारित होता है।


धन उड़ जाता है


सुलैमान ने स्वयं लिखा:


"क्या तू अपनी दृष्टि उस वस्तु पर लगाएगा जो स्थिर नहीं रहती? क्योंकि धन पंख लगाकर उकाब की नाईं उड़ जाता है।"

 

धन:


  • आज है, कल नहीं।
  • शेयर बाजार गिर सकता है।
  • व्यापार असफल हो सकता है।
  • नौकरी समाप्त हो सकती है।

इसलिए जो व्यक्ति केवल धन पर भरोसा करता है, उसकी नींव अस्थिर होती है।


मसीह के बिना धन व्यर्थ है


बिली ग्राहम कहते हैं:


"मैं मसीह के साथ गरीब होना पसंद करूँगा, बजाय इसके कि मसीह के बिना संसार का सबसे धनी व्यक्ति बनूँ।"

 

क्यों?


क्योंकि धन शरीर की कुछ आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है, लेकिन आत्मा की नहीं।


धन:


  • भोजन खरीद सकता है, पर भूख नहीं मिटा सकता।
  • बिस्तर खरीद सकता है, पर शांति की नींद नहीं।
  • दवा खरीद सकता है, पर जीवन नहीं।
  • मनोरंजन खरीद सकता है, पर आनंद नहीं।

वास्तविक धन क्या है?


बाइबल सिखाती है कि सच्चा धन है:


  • परमेश्वर की कृपा
  • पापों की क्षमा
  • अनन्त जीवन
  • परमेश्वर के साथ संबंध

ये वे धन हैं जो कभी नष्ट नहीं होते।


मुख्य संदेश


सुलैमान ने धन और वैभव की चरम सीमा को छुआ।


फिर भी उसने पाया:


"सब कुछ व्यर्थ है।"

 

क्योंकि धन हृदय की गहरी प्यास को नहीं बुझा सकता।


वास्तविक संतुष्टि केवल यीशु मसीह में मिलती है।


सुलैमान की चौथी खोज — शक्ति और प्रतिष्ठा


धन और सुख के बाद सुलैमान ने शक्ति (Power), प्रतिष्ठा (Prestige) और अधिकार (Authority) में जीवन का अर्थ खोजने का प्रयास किया।


उस समय संसार में शायद ही कोई राजा उसके समान शक्तिशाली था।


बिली ग्राहम बताते हैं कि:


  • सुलैमान के पास सबसे शक्तिशाली सेना थी।
  • उसके पास महान नौसेना थी।
  • आसपास का कोई राष्ट्र उसके विरुद्ध खड़ा होने का साहस नहीं करता था।

उसके पास वह प्रभाव था जिसकी आज भी बहुत लोग इच्छा करते हैं।


मनुष्य शक्ति क्यों चाहता है?


आज भी लोग शक्ति चाहते हैं।


कुछ लोग चाहते हैं:


  • पद और अधिकार
  • राजनीतिक प्रभाव
  • प्रसिद्धि
  • सम्मान
  • लोगों पर नियंत्रण

वे सोचते हैं:


"यदि मैं शीर्ष पर पहुँच जाऊँ, तो मैं खुश हो जाऊँगा।"

 

लेकिन सुलैमान का अनुभव कुछ और ही बताता है।


शक्ति भी संतुष्टि नहीं दे सकी


सुलैमान ने अपनी शक्ति और सामर्थ्य को देखा।


फिर उसने वही निष्कर्ष निकाला:


"यह भी एक बुलबुला है जो फूट जाता है।"

 

यानी शक्ति भी स्थायी संतुष्टि नहीं दे सकी।


यीशु का प्रश्न


यीशु ने कहा:


"यदि मनुष्य सारे संसार को प्राप्त कर ले, परन्तु अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा?"

 

यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर हर व्यक्ति को देना होगा।


क्या लाभ है यदि:


  • आपके पास प्रसिद्धि हो,
  • आपके पास शक्ति हो,
  • आपके पास पैसा हो,

लेकिन आपकी आत्मा परमेश्वर से दूर हो?


सबसे बड़ी कमी


बिली ग्राहम कहते हैं कि बहुत से लोग:


  • कलीसिया जाते हैं,
  • धार्मिक गतिविधियाँ करते हैं,
  • धार्मिक पहचान रखते हैं,

लेकिन फिर भी उनके जीवन में कुछ कमी रहती है।


वह कमी क्या है?


यीशु मसीह के साथ व्यक्तिगत संबंध


धर्म पर्याप्त नहीं है।


परंपरा पर्याप्त नहीं है।


नाममात्र की मसीहियत पर्याप्त नहीं है।


मनुष्य को जीवित मसीह के साथ व्यक्तिगत संबंध की आवश्यकता है।


परमेश्वर की शक्ति


पौलुस ने लिखा:


"परमेश्वर ने हमें भय की आत्मा नहीं, पर सामर्थ, प्रेम और संयम की आत्मा दी है।"

 

दुनिया की शक्ति:


  • दूसरों पर नियंत्रण चाहती है।

मसीह की शक्ति:


  • हमारे जीवन को बदलती है।
  • हमारे भय को दूर करती है।
  • हमें प्रेम करना सिखाती है।

असली शक्ति कौन-सी है?


दुनिया कहती है:


"शक्ति का अर्थ है लोगों पर अधिकार रखना।"

 

यीशु कहते हैं:


"शक्ति का अर्थ है परमेश्वर के अधीन होना।"

 

दुनिया की शक्ति अस्थायी है।


परमेश्वर की शक्ति अनन्त है।


मुख्य संदेश


सुलैमान ने:


  • ज्ञान पाया,
  • सुख पाया,
  • धन पाया,
  • शक्ति पाई,

लेकिन इनमें से कोई भी उसके हृदय को तृप्त नहीं कर सका।


उसने पाया कि मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता शक्ति नहीं, बल्कि परमेश्वर है।


सुलैमान की पाँचवीं खोज — कला, संस्कृति, उपलब्धियाँ और धर्म


धन, सुख और शक्ति की खोज के बाद सुलैमान ने सोचा कि शायद जीवन का अर्थ कला, संगीत, संस्कृति, निर्माण कार्यों और धार्मिक गतिविधियों में मिलेगा।


उसने अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए सब कुछ किया।


सभोपदेशक में वह बताता है:


"मैंने अपने लिए तालाब बनवाए, गायक और गायिकाएँ रखीं, और हर वह वस्तु प्राप्त की जिसकी मेरी आँखों ने इच्छा की।" 

 

कला और मनोरंजन की खोज


सुलैमान ने:


  • सुंदर बगीचे बनवाए
  • संगीत सभाएँ आयोजित कीं
  • कलाकारों को रखा
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया

उसके पास उस समय उपलब्ध सर्वोत्तम कला और मनोरंजन था।


आज के समय में यह वैसा ही होगा जैसे:


  • सबसे बड़े संगीत कार्यक्रम
  • सबसे शानदार फिल्में
  • सबसे सुंदर पर्यटन स्थल
  • सबसे महंगे सांस्कृतिक अनुभव

लेकिन अंत में उसने पाया कि इनमें भी स्थायी संतुष्टि नहीं है।


"जो कुछ मेरी आँखों ने चाहा..."


सुलैमान कहता है:


"जो कुछ मेरी आँखों ने चाहा, मैंने उसे नहीं रोका।"

 

कल्पना कीजिए।


जिस चीज़ की इच्छा हुई, वह उसे मिल गई।


फिर भी अंत में उसका निष्कर्ष वही था:


"सब व्यर्थ है और मन की व्यथा है।"

 

मनुष्य की समस्या क्या है?


बिली ग्राहम कहते हैं:


यदि आपको वह सब मिल जाए जिसके लिए आप आज प्रयास कर रहे हैं, तब भी संभव है कि आपके भीतर का खालीपन बना रहे।


क्यों?


क्योंकि मनुष्य केवल भौतिक जीवन के लिए नहीं बनाया गया।


उसके भीतर एक आत्मिक आवश्यकता है जिसे केवल परमेश्वर ही पूरा कर सकता है।


सुलैमान की धार्मिक खोज


सुलैमान ने केवल कला और संस्कृति ही नहीं, बल्कि धर्म की भी खोज की।


उसने संसार के सबसे भव्य मंदिरों में से एक का निर्माण कराया।


सुलैमान का मंदिर


  • उसे बनने में सात वर्ष लगे।
  • लगभग 1,50,000 मजदूरों ने काम किया।
  • वह उस समय संसार के आश्चर्यों में गिना जाता था।
  • मंदिर में अत्यधिक सोना लगाया गया था।

यह एक अद्भुत धार्मिक उपलब्धि थी।


लेकिन धर्म भी पर्याप्त नहीं था


यहीं बिली ग्राहम एक महत्वपूर्ण सत्य बताते हैं:


"मसीह के साथ व्यक्तिगत संबंध के बिना धर्म आत्मा को नहीं बचा सकता।"

 

धार्मिक गतिविधियाँ अच्छी हैं।


कलीसिया जाना अच्छा है।


सेवा करना अच्छा है।


लेकिन यदि व्यक्ति का हृदय परमेश्वर से दूर है, तो केवल धार्मिकता उसे शांति नहीं दे सकती।


जीवन के सबसे बड़े प्रश्न


बिली ग्राहम पूछते हैं:


  • शांति कहाँ है?
  • संतुष्टि कहाँ है?
  • जीवन का उद्देश्य कहाँ है?
  • जीवन का अर्थ कहाँ है?

सुलैमान ने इन प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए लगभग हर रास्ता अपनाया।


लेकिन अंत में वह एक निष्कर्ष पर पहुँचा।


सुलैमान का अंतिम निष्कर्ष


सभोपदेशक की पुस्तक के अंत में सुलैमान कहता है:


"सब बातों का सार यह है: परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर, क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्तव्य यही है।"

 

सुलैमान ने समझ लिया कि:


  • ज्ञान पर्याप्त नहीं
  • सुख पर्याप्त नहीं
  • सेक्स पर्याप्त नहीं
  • धन पर्याप्त नहीं
  • शक्ति पर्याप्त नहीं
  • कला पर्याप्त नहीं
  • धर्म भी पर्याप्त नहीं

मनुष्य को परमेश्वर की आवश्यकता है।


न्याय का दिन आने वाला है


सुलैमान ने यह भी कहा:


"परमेश्वर हर काम का न्याय करेगा, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, यहाँ तक कि गुप्त बातों का भी।"

 

इसलिए जीवन का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है:


  • आपके पास कितना धन है।
  • आप कितने प्रसिद्ध हैं।
  • आप कितने सफल हैं।

बल्कि यह है:


"क्या आप परमेश्वर के सामने खड़े होने के लिए तैयार हैं?"

 

मुख्य संदेश


सुलैमान ने सब कुछ आज़माया:


✅ ज्ञान
✅ सुख
✅ सेक्स
✅ धन
✅ शक्ति
✅ कला और संस्कृति
✅ धर्म


लेकिन अंत में उसने पाया:


"परमेश्वर के बिना सब कुछ व्यर्थ है।"

 

सच्चा अर्थ, सच्ची शांति और सच्ची संतुष्टि केवल परमेश्वर के साथ संबंध में मिलती है।


"सुलैमान से भी महान कौन है?" — यीशु मसीह


पूरे संदेश का सबसे महत्वपूर्ण भाग यहाँ आता है।


यीशु ने कहा:


"देखो, यहाँ सुलैमान से भी महान एक है।"

 

सवाल यह है:


सुलैमान से महान कौन है?


उत्तर है:


यीशु मसीह।


1. यीशु ज्ञान में सुलैमान से महान हैं


सुलैमान संसार का सबसे बुद्धिमान मनुष्य माना जाता था।


फिर भी उसका ज्ञान उसे जीवन का अंतिम उत्तर नहीं दे सका।


लेकिन बाइबल कहती है:


"ज्ञान और बुद्धि के सारे भण्डार मसीह में छिपे हुए हैं।" (कुलुस्सियों 2)

 

बिली ग्राहम कहते हैं:


यदि आप यीशु मसीह को जानते हैं, तो आपने वह पा लिया है जिसकी खोज संसार के सबसे बड़े विद्वान भी कर रहे हैं।


क्योंकि मसीह केवल ज्ञान नहीं देते—


वह सत्य स्वयं हैं।


2. यीशु आनंद में सुलैमान से महान हैं


सुलैमान ने सुख, मनोरंजन, संगीत, सेक्स और भोग-विलास का अनुभव किया।


फिर भी उसने कहा:


"सब कुछ व्यर्थ है।"

 

लेकिन मसीह एक ऐसा आनंद देते हैं जो परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करता।


जब कोई व्यक्ति मसीह को ग्रहण करता है:


  • पवित्र आत्मा उसके जीवन में आता है।
  • उसके भीतर अलौकिक आनंद उत्पन्न होता है।
  • वह ऐसी शांति पाता है जिसे संसार नहीं दे सकता।

3. यीशु धन में सुलैमान से महान हैं


बाइबल कहती है:


"यद्यपि वह धनी था, तौभी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया, ताकि तुम उसकी कंगाली के द्वारा धनी हो जाओ।"

 

यहाँ धन केवल पैसों की बात नहीं है।


मसीह हमें देते हैं:


  • परमेश्वर की क्षमा
  • अनन्त जीवन
  • स्वर्ग की आशा
  • आत्मिक आशीषें

ये ऐसी सम्पत्तियाँ हैं जिन्हें कोई छीन नहीं सकता।


4. यीशु शक्ति में सुलैमान से महान हैं


सुलैमान के पास महान सेना थी।


लेकिन यीशु के विषय में बाइबल कहती है:


"स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है।"

 

एक दिन यीशु महिमा और सामर्थ्य के साथ फिर आएँगे।


उनकी शक्ति केवल राजनीतिक या सैन्य शक्ति नहीं है।


वह पाप को तोड़ने, जीवन बदलने और मनुष्य को नया बनाने की शक्ति है।


मनुष्य वास्तव में क्या खोज रहा है?


बिली ग्राहम कहते हैं कि लोग खोज रहे हैं:


  • सेक्स में
  • नशे में
  • मनोरंजन में
  • पार्टियों में
  • प्रसिद्धि में
  • धन में

लेकिन उन्हें वह नहीं मिलता जिसकी उनके हृदय को आवश्यकता है।


क्यों?


क्योंकि मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को खोज रहा है।


उसकी आत्मा उसी के लिए बनाई गई है।


यीशु ने कहा


"मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूँ।"

 

उन्होंने यह नहीं कहा:


"मैं एक मार्ग हूँ।"

 

उन्होंने कहा:


"मैं ही मार्ग हूँ।"

 

उन्होंने यह भी कहा:


"तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।"

 

मसीह क्या देते हैं?


यीशु हमेशा समस्याओं को तुरंत समाप्त नहीं करते।


लेकिन वे हमें देते हैं:


  • समस्याओं के बीच शांति
  • दुःख के बीच आशा
  • संघर्ष के बीच सामर्थ्य
  • मृत्यु के सामने भी विश्वास

यही कारण है कि लाखों लोगों ने मसीह में जीवन का अर्थ पाया है।


बिली ग्राहम की अंतिम अपील


अपने संदेश के अंत में बिली ग्राहम लोगों को आमंत्रित करते हैं कि वे अपने जीवन को यीशु मसीह को सौंप दें।


वे कहते हैं:


"आज ही निर्णय लो।"

"मसीह को अपने जीवन में पहला स्थान दो।"

"अपने पूरे हृदय से उनके पास आओ।"

 

क्योंकि बाइबल कहती है:


"अब उद्धार का दिन है।"

"आज ही परमेश्वर की ओर लौट आओ।"

 

पूरे संदेश का निष्कर्ष


सुलैमान ने खोजा:


  • ज्ञान
  • सेक्स
  • सुख
  • धन
  • शक्ति
  • कला
  • धर्म

लेकिन अंत में पाया:


"सब कुछ व्यर्थ है।"

 

फिर यीशु आए और कहा:


"सुलैमान से भी महान यहाँ है।"

 

बिली ग्राहम का मुख्य संदेश यह है:


जीवन का अर्थ ज्ञान, धन, सेक्स, शक्ति या धर्म में नहीं है। जीवन का अर्थ और सच्ची संतुष्टि केवल यीशु मसीह के साथ व्यक्तिगत संबंध में मिलती है।


"परमेश्वर का भय मानो, उसकी आज्ञाओं का पालन करो, और यीशु मसीह पर विश्वास करो — यही जीवन का सच्चा उद्देश्य है।" 

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