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क्या बपतिस्मा के बिना उद्धार संभव है?

बाइबल के अनुसार उद्धार अनुग्रह और विश्वास के द्वारा मिलता है, न कि किसी धार्मिक कर्म के द्वारा। बपतिस्मा मसीही जीवन में एक महत्वपूर्ण आज्ञाकारिता का कदम है, लेकिन स्वयं बपतिस्मा उद्धार का कारण नहीं है। सच्चा उद्धार यीशु मसीह पर विश्वास से मिलता है (इफिसियों 2:8-9), और बपतिस्मा उस विश्वास की सार्वजनिक गवाही है। परिचय: यह प्रश्न क्यों महत्वपूर्ण है? मसीही जीवन में बपतिस्मा एक महत्वपूर्ण विषय है। बहुत से लोग पूछते हैं: क्या बपतिस्मा के बिना उद्धार मिल सकता है? क्या बपतिस्मा उद्धार के लिए आवश्यक है? क्या कोई व्यक्ति बिना बपतिस्मा के स्वर्ग जा सकता है? इन प्रश्नों का उत्तर समझने के लिए हमें बाइबल की शिक्षा को ध्यान से देखना होगा। क्योंकि यदि हम इस विषय को सही ढंग से नहीं समझते, तो हम या तो बपतिस्मा को बहुत कम महत्व देंगे या उसे उद्धार का साधन मान लेंगे। बाइबल हमें संतुलित समझ देती है। उद्धार कैसे मिलता है? सबसे पहले हमें यह समझना चाहिए कि बाइबल के अनुसार उद्धार कैसे मिलता है। “क्योंकि अनुग्रह ही से तुम्हें विश्वास के द्वारा उद्धार मिला है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् प...

फल और उद्धार में क्या संबंध है?

फल और उद्धार में क्या संबंध है? जानें कि बाइबल के अनुसार अच्छे कार्य और आत्मिक फल सच्चे उद्धार का प्रमाण कैसे हैं। बाइबल के अनुसार अच्छे फल सच्चे उद्धार का परिणाम हैं, कारण नहीं। उद्धार अनुग्रह और विश्वास से मिलता है (इफिसियों 2:8-9), लेकिन सच्चा विश्वास जीवन में परिवर्तन और आत्मिक फल उत्पन्न करता है (गलातियों 5:22-23)। इसलिए फल उद्धार का प्रमाण हैं, न कि उद्धार पाने का साधन। परिचय: क्या अच्छे काम उद्धार दिलाते हैं? बहुत से लोग यह सोचते हैं कि अच्छे काम करने से उद्धार मिलेगा। कुछ लोग मानते हैं कि अगर हम पर्याप्त धार्मिक या दयालु हों, तो परमेश्वर हमें स्वीकार करेंगे। लेकिन बाइबल इस विषय में क्या सिखाती है? क्या फल और उद्धार एक ही बात हैं? या उनका आपस में कोई अलग संबंध है? यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हमारा पूरा मसीही जीवन प्रभावित होता है। उद्धार कैसे मिलता है? सबसे पहले हमें समझना होगा कि उद्धार कैसे मिलता है। “क्योंकि अनुग्रह ही से तुम्हें विश्वास के द्वारा उद्धार मिला है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है; और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घम...

पवित्र आत्मा उद्धार में क्या भूमिका निभाते हैं?

बाइबल के अनुसार पवित्र आत्मा उद्धार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मनुष्य को पाप का एहसास दिलाते हैं, उसे यीशु मसीह की ओर आकर्षित करते हैं, विश्वास उत्पन्न करते हैं और विश्वासियों के जीवन में नया आत्मिक परिवर्तन लाते हैं (यूहन्ना 16:8)। पवित्र आत्मा के कार्य के बिना कोई व्यक्ति सच्चे रूप में उद्धार का अनुभव नहीं कर सकता। परिचय: उद्धार केवल मानव प्रयास नहीं है जब हम उद्धार के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हम केवल यीशु मसीह के बलिदान और अपने विश्वास के बारे में सोचते हैं। लेकिन बाइबल हमें सिखाती है कि उद्धार की प्रक्रिया में पवित्र आत्मा की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है । परमेश्वर की त्रिएकता में: पिता योजना बनाते हैं पुत्र उद्धार का कार्य पूरा करते हैं और पवित्र आत्मा उस उद्धार को हमारे जीवन में लागू करते हैं। यदि पवित्र आत्मा कार्य न करें, तो मनुष्य परमेश्वर की सच्चाई को समझ ही नहीं सकता। पवित्र आत्मा कौन हैं? पवित्र आत्मा केवल कोई शक्ति या भावना नहीं हैं। वे परमेश्वर का तीसरा व्यक्तित्व हैं। बाइबल कहती है: “परन्तु सहायक अर्थात् पवित्र आत्मा… वह तुम...

क्या उद्धार का मतलब समस्या-मुक्त जीवन है?

उद्धार का अर्थ समस्या-मुक्त जीवन नहीं है। बाइबल सिखाती है कि जब कोई व्यक्ति यीशु मसीह पर विश्वास करता है, तो उसे पाप से उद्धार मिलता है और परमेश्वर के साथ नया संबंध मिलता है। लेकिन जीवन में संघर्ष, परीक्षाएँ और कठिनाइयाँ फिर भी आ सकती हैं। फर्क यह है कि अब विश्वासी अकेला नहीं होता—परमेश्वर उसके साथ होते हैं और उसे हर परिस्थिति में संभालते हैं। परिचय: क्या मसीह में आने के बाद जीवन आसान हो जाता है? बहुत से लोग सोचते हैं कि जब कोई व्यक्ति यीशु मसीह को स्वीकार करता है, तब उसके जीवन की सारी समस्याएँ समाप्त हो जाती हैं। कभी-कभी प्रचार में भी ऐसा सुनने को मिलता है कि अगर हम परमेश्वर पर विश्वास करें तो हमारे जीवन में केवल आशीष ही आशीष होगी। लेकिन क्या बाइबल वास्तव में ऐसा सिखाती है? सच्चाई यह है कि उद्धार का मतलब यह नहीं कि जीवन में कोई समस्या नहीं होगी। बल्कि इसका अर्थ है कि हम पाप और अनन्त दण्ड से बचाए जाते हैं और परमेश्वर के साथ एक नया संबंध प्राप्त करते हैं। मसीही जीवन में शांति, आशा और अनन्त जीवन का वादा है, लेकिन पृथ्वी पर जीवन में संघर्ष और परीक्षाएँ फिर भी आती हैं। उद्धार का वास्त...

क्या उद्धार के बाद संघर्ष और परीक्षा आती हैं?

हाँ, बाइबल के अनुसार उद्धार पाने के बाद भी विश्वासियों के जीवन में संघर्ष और परीक्षाएँ आती हैं। लेकिन परमेश्वर इन परीक्षाओं का उपयोग विश्वास को मजबूत करने और आत्मिक रूप से बढ़ाने के लिए करते हैं (याकूब 1:2–3)। उद्धार का अर्थ यह नहीं कि समस्याएँ समाप्त हो जाएँ, बल्कि यह कि परमेश्वर हमारे साथ होते हैं। परिचय: कई लोग यह क्यों सोचते हैं? कुछ लोग मानते हैं कि जब कोई व्यक्ति यीशु मसीह को स्वीकार करता है, तो उसके जीवन में सारी समस्याएँ समाप्त हो जाती हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि: विश्वासियों के जीवन में भी संघर्ष आते हैं परीक्षाएँ आती हैं कठिन परिस्थितियाँ आती हैं बाइबल स्पष्ट रूप से सिखाती है कि विश्वास का जीवन संघर्षों से मुक्त नहीं है। 1. यीशु ने पहले ही चेतावनी दी थी यीशु ने अपने चेलों को बताया कि इस संसार में कठिनाइयाँ आएँगी। “संसार में तुम्हें क्लेश होगा, परन्तु हियाव बाँधो।” — यूहन्ना 16:33 इसका अर्थ है: संघर्ष सामान्य हैं वे विश्वास की यात्रा का हिस्सा हैं लेकिन आशा यह है कि यीशु संसार पर जय पा चुके हैं। 2. परीक्षाएँ विश्वास को मजबूत करती हैं बाइबल स...