शिशु बपतिस्मा और बाइबल क्या कहती है?

बाइबल में स्पष्ट रूप से शिशु बपतिस्मा का उल्लेख नहीं मिलता। बाइबल में अधिकतर उदाहरणों में पहले व्यक्ति सुसमाचार सुनता है, फिर विश्वास करता है, और उसके बाद बपतिस्मा लेता है। इसलिए कई मसीही मानते हैं कि बपतिस्मा व्यक्तिगत विश्वास के बाद लिया जाना चाहिए (प्रेरितों के काम 2:38)।

परिचय: शिशु बपतिस्मा क्यों एक महत्वपूर्ण विषय है?

मसीही कलीसिया में बपतिस्मा एक महत्वपूर्ण विषय है।

लेकिन एक प्रश्न अक्सर उठता है:

क्या शिशुओं को बपतिस्मा देना चाहिए?

कुछ कलीसियाएँ शिशु बपतिस्मा का अभ्यास करती हैं, जबकि अन्य मानती हैं कि बपतिस्मा तब होना चाहिए जब व्यक्ति स्वयं विश्वास करे।

इस विषय को समझने के लिए हमें बाइबल की शिक्षा को ध्यान से देखना होगा।

क्योंकि हमारा उद्देश्य केवल परंपरा का पालन करना नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन के अनुसार चलना होना चाहिए।

बपतिस्मा क्या है?

सबसे पहले हमें समझना होगा कि बपतिस्मा क्या है।

बपतिस्मा मसीही विश्वास का एक प्रतीकात्मक कार्य है।

यह दर्शाता है:

  • पाप से मुक्ति

  • पुराने जीवन का अंत

  • मसीह में नया जीवन

बाइबल कहती है:

“इसलिए हम उसके साथ बपतिस्मा के द्वारा मृत्यु में गाड़े गए।”
— रोमियों 6:4

इसका अर्थ है कि बपतिस्मा उस व्यक्ति के जीवन में हुए आत्मिक परिवर्तन को दर्शाता है।

बाइबल में बपतिस्मा का क्रम

यदि हम नए नियम को ध्यान से पढ़ें, तो एक स्पष्ट क्रम दिखाई देता है।

1. सुसमाचार सुनना

2. विश्वास करना

3. मन फिराना

4. बपतिस्मा लेना

उदाहरण:

“मन फिराओ और तुम में से हर एक यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले।”
— प्रेरितों के काम 2:38

इस वचन में पहले मन फिराने और विश्वास की बात है, फिर बपतिस्मा की।

शिशु बपतिस्मा के समर्थन में तर्क

कुछ कलीसियाएँ शिशु बपतिस्मा का समर्थन करती हैं।

वे कुछ बाइबलीय उदाहरणों का उल्लेख करती हैं।

1. पूरे घराने का बपतिस्मा

बाइबल में कुछ स्थानों पर लिखा है कि पूरे घराने ने बपतिस्मा लिया।

उदाहरण:

“उसने और उसके सारे घराने ने बपतिस्मा लिया।”
— प्रेरितों के काम 16:33

कुछ लोग मानते हैं कि इसमें बच्चे भी शामिल हो सकते हैं।

2. पुराने नियम की परंपरा

कुछ लोग खतना और बपतिस्मा के बीच संबंध बताते हैं।

पुराने नियम में बच्चों का खतना किया जाता था, इसलिए वे मानते हैं कि नए नियम में बच्चों का बपतिस्मा हो सकता है।

शिशु बपतिस्मा के विरुद्ध तर्क

दूसरी ओर, कई मसीही यह मानते हैं कि बपतिस्मा केवल उन लोगों को दिया जाना चाहिए जो स्वयं विश्वास करते हैं।

इसके कुछ कारण हैं।

1. विश्वास की आवश्यकता

बाइबल बार-बार बताती है कि बपतिस्मा से पहले विश्वास आवश्यक है।

“जो विश्वास करेगा और बपतिस्मा लेगा वह उद्धार पाएगा।”
— मरकुस 16:16

शिशु स्वयं विश्वास व्यक्त नहीं कर सकते।

2. व्यक्तिगत निर्णय

मसीही जीवन एक व्यक्तिगत निर्णय है।

हर व्यक्ति को स्वयं यीशु मसीह को स्वीकार करना होता है।

“जो कोई उसे ग्रहण करता है वह परमेश्वर का सन्तान बनता है।”
— यूहन्ना 1:12

3. बाइबल में शिशु बपतिस्मा का स्पष्ट उदाहरण नहीं

नए नियम में कहीं भी स्पष्ट रूप से यह नहीं लिखा कि किसी शिशु को बपतिस्मा दिया गया।

अधिकतर उदाहरणों में पहले विश्वास हुआ और फिर बपतिस्मा।

यीशु और बच्चों के बारे में बाइबल क्या कहती है?

यीशु बच्चों से प्रेम करते थे।

उन्होंने कहा:

“बालकों को मेरे पास आने दो।”
— मत्ती 19:14

इसका अर्थ यह है कि बच्चे परमेश्वर के लिए मूल्यवान हैं।

लेकिन इस वचन में बपतिस्मा का उल्लेख नहीं है।

यह हमें सिखाता है कि बच्चों को परमेश्वर के पास लाना महत्वपूर्ण है।

माता-पिता की जिम्मेदारी

यदि शिशु बपतिस्मा का प्रश्न उठता है, तो माता-पिता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

माता-पिता को चाहिए कि वे:

  • बच्चों को परमेश्वर के वचन की शिक्षा दें

  • उन्हें प्रार्थना सिखाएँ

  • उन्हें मसीही जीवन का उदाहरण दिखाएँ

“बालक को उसी मार्ग की शिक्षा दे जिस पर उसे चलना चाहिए।”
— नीतिवचन 22:6

मसीही कलीसिया में संतुलन

आज विभिन्न कलीसियाओं में इस विषय पर अलग-अलग विचार हैं।

कुछ कलीसियाएँ:

  • शिशु समर्पण (dedication) करती हैं

  • और बाद में विश्वास के बाद बपतिस्मा देती हैं

दूसरी कलीसियाएँ:

  • शिशु बपतिस्मा का अभ्यास करती हैं

इसलिए महत्वपूर्ण बात यह है कि हम बाइबल की शिक्षा को समझें और प्रेम व एकता में रहें।

व्यावहारिक सीख

यदि आप माता-पिता हैं, तो आप यह कर सकते हैं:

  • अपने बच्चों को परमेश्वर को समर्पित करें

  • उन्हें बाइबल सिखाएँ

  • उन्हें यीशु के बारे में बताएं

जब वे बड़े होकर स्वयं विश्वास करें, तब वे बपतिस्मा ले सकते हैं।

निष्कर्ष

तो प्रश्न है:

शिशु बपतिस्मा और बाइबल क्या कहती है?

बाइबल में स्पष्ट रूप से शिशु बपतिस्मा का उल्लेख नहीं है।

अधिकतर उदाहरणों में:

  • पहले विश्वास

  • फिर बपतिस्मा

इसलिए कई मसीही मानते हैं कि बपतिस्मा व्यक्तिगत विश्वास के बाद होना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम परमेश्वर के वचन को समझें और उसके अनुसार जीवन जीएँ।

🙏 छोटी प्रार्थना

हे स्वर्गीय पिता,

धन्यवाद कि आपने हमें अपना वचन दिया जिससे हम सच्चाई को समझ सकते हैं।
हमें बुद्धि दें कि हम आपकी इच्छा के अनुसार जीवन जी सकें।

हमारे परिवारों और बच्चों को आशीष दें
और उन्हें आपके मार्ग में चलने की शिक्षा दें।

यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करते हैं।
आमीन।

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